अपील

मुव्मेंट फॉर पीस एंड जस्टिस फॉर वेलफेयर (एमपीजे) को आप की ज़रुरत है, क्योंकि आप ख़ुद समाज में एक बड़ा बदलाव चाहते हैं! आप की ज़रुरत इस लिए भी है की आप एक अच्छे दिल और दीमाग के मालिक हैं जो न केवल दूसरों का दर्द महसूस करता है बल्कि उस दर्द को बांटने में भी विश्वास करता है! नेल्सन मंडेला ने कहा था कि, एक अच्छा दिमाग और एक अच्छा दिल हमेशा से विजयी जोड़ी रहे हैं और आज हमें आप जैसे विजेताओं की ज़रुरत है!

आप प्रदेश की वर्तमान सामाजिक एवं आर्थिक दशा देख रहे हैं! प्रदेश में ग़रीबी, भुखमरी, बीमारी, बेरोज़गारी तथा भ्रष्टाचार जैसी अनेक समस्याएँ मुंह बाए खड़ी हैं! समाज का एक बड़ा तबक़ा आज भी ज़िन्दगी बसर करने के लिए ज़रूरी बुनयादी सुविधाओं से वंचित है! आज भी प्रदेश में सामाजिक एवं आर्थिक विषमता एवं असामनता साफ़ तौर पर नज़र आता है! हर व्यक्ति शांति एवं सुख का अभिलाषी है और इस लक्ष्य को पाने के लिए बड़े बदलाव की ज़रुरत है!

इसी बदलाव एवं लोगों को उसका अधिकार दिलाने के लिए ही तो सामाजिक संगठनें दिन और रात एक कर के काम कर रही हैं! यह सामाजिक संगठन ही तो है, जिसने सरकार से लड़कर आपको सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार तथा खाद्य सुरक्षा जैसे अनेक लाभ पहुंचाए! सामाजिक संगठनों को भी तो आप जैसे उर्जावान लोग ही चलाते हैं!

इसलिए एमपीजे को आप की ज़रुरत है, क्योंकि आप में बदलाव लाने की क्षमता है! महात्मा गाँधी ने भी तो कहा था कि, खुद वह बदलाव बनिए जो दुनिया में आप देखना चाहते हैं!

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प्री-मैट्रिक अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति की राशी में वृद्धि के साथ साथ इनकम सर्टिफिकेट जमा करने की शर्त को ख़त्म करे सरकार: एम पी जे



प्री-मैट्रिक स्तर पर छात्रवृत्ति अल्पसंख्यक समुदायों से माता-पिता को अपने स्कूल जाने वाले बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु शुरू किया गया था. इस योजना का मक़सद स्कूल शिक्षा पर ग़रीब माता-पिता के वित्तीय बोझ को हल्का करने और स्कूल ड्राप आउट की दर को कम करना था और शिक्षा के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदायों का सशक्तिकरण कर के उनके सामाजिक आर्थिक स्थितियों में परिवर्तन लाना था. किन्तु ये योजना भी प्रथम दिन से ही लालफीताशाही का शिकार रही है.

 

आपको बता दें कि महाराष्ट्र में अल्पसंख्यक प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति का भुगतान शुरू से ही विवादित रहा है. महाराष्ट्र सरकार को केंद्र सरकार से छात्रवृत्ति निधि प्राप्त होने के बावजूद वर्षों तक बच्चों को छात्रवृत्ति के पैसे नहीं दिए गए थे. एमपीजे ने इसके लिए सड़क से लेकर अदालत तक एक सफल लड़ाई लड़ी है. एमपीजे के ही न्यायिक हस्तक्षेप के बाद राज्य में इस योजना के तहत पहली बार बच्चों को छात्रवृत्ति की राशि का भुगतान किया गया था. मुव्हमेंट फ़ॉर पीस एंड जस्टिस फ़ॉर वेलफेयर (एमपीजे ) शुरू से ही स्कालरशिप की लड़ाई लड़ती आई है.


गौर तलब है कि, महाराष्ट्र में प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना (2020-21) के लिए लाखों नए और नवीकरण आवेदन ऑनलाइन प्रस्तुत किए गए हैं. हमेशा की तरह इस बार भी, संबंधित स्कूलों और शिक्षा कार्यालयों ने राज्य नोडल अधिकारी को सत्यापित आवेदन पत्र अग्रेषित किए थे.

 

किन्तु, ज्ञात हुआ है कि, महाराष्ट्र राज्य के नोडल अधिकारी ने अपने पत्र दिनांक 18 और 21 जनवरी 2021 के संदर्भ में सभी नए और नवीकरण आवेदन वापस कर दिए हैं, और सक्षम प्राधिकारी से आय प्रमाण पत्र के प्रमाण की मांग करते हुए सभी आवेदनों को फिर से सत्यापित करने का निर्देश दिया है. गौर तलब है कि, प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आय प्रमाण के रूप में स्व घोषणा/शपथ पत्र को आय प्रमाण के रूप में माना जाता है, किन्तु अल्पसंख्यक के मामले में सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्गत आय प्रमाण पत्र को फिर से सत्यापित करने का आदेश दिया गया है, जो समझ से परे है.

एम पी जे ने महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधान मंत्री को ज्ञापन सौंप कर इनकम सर्टिफिकेट जमा करने की शर्त को ख़त्म करने और स्व घोषणा / शपथ पत्र को आय प्रमाण के रूप में मानने का अनुरोध किया है. इसके अलावा प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक स्कालरशिप की राशि को बढ़ाने का भी अनुरोध किया है.    










आरोग्य मंत्री महाराष्ट्र श्री राजेश टोपे ने एम पी जे के कामों को सराहा



एम पी जे महाराष्ट्र के शिष्ट मंडल के साथ स्वास्थ्य के मुद्दे पर बात-चीत करते हुए , श्री राजेश टोपे, माननीय स्वास्थ्य मंत्री, महाराष्ट्र ने एम पी जे के कामों को सराहते हुए कहा कि मैं पहले से इस संगठन को जानता हूँ, जो फ़ूड, एजुकेशन और हेल्थ पर बहुत अच्छा काम कर रही है. मंत्री महोदय ने हाल ही में संपन्न हुए स्वास्थ्य कैंपेन की प्रशंसा करते हुए कहा कि एम पी जे ने प्रदेश में पब्लिक हेल्थ सिस्टम का जो सर्वे किया है, वह डाटा मैं देखना चाहूँगा.      


एमपीजे ने आरोग्य मंत्री से मुलाक़ात कर के प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने का किया अनुरोध

 


एमपीजे के एक शिष्ट मंडल ने दिनांक 18 दिसम्बर 2020 को महाराष्ट्र के आरोग्य मंत्री मा. श्री राजेश टोपे जी से जालना में मुलाक़ात कर के उन्हें राज्य की लचर सार्वजानिक स्वास्थ्य व्यवस्था को ठीक करने का आग्रह किया. दरअसल मंत्री महोदय से ये मुलाक़ात हाल ही में एम पी जे द्वारा राज्यव्यापी स्तर पर प्राइमरी हेल्थ सेंटर से लेकर डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल का सर्वे किया गया. जिसके नतीजे बड़े ही निराशाजनक रहे.

 

गौर तलब है कि, Covid-19 के दौरान पब्लिक हेल्थ इंस्टीट्यूटशंस की  दयनीय हालत की वजह से आम जन को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा और निजी अस्पतालों ने  Covid-19 के इलाज के लिए लोगों से मनमाना पैसा वसूल किया. उस के बाद संगठन ने राज्य के पब्लिक हेल्थ इंस्टीट्यूटशंस में उपलब्ध सुविधाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए एक अभियान चलाया, जिसके तहत ये सर्वे किए गए. इस सर्वे में कई अस्पतालों में आई पी एच एस द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुरूप दर्जेदार हेल्थ केयर सुविधा उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई. श्री अज़ीम पाशा, एम पी जे प्रदेश सचिव के नेतृत्व में इस शिष्ट मंडल ने मंत्री महोदय से मुलाक़ात की जिसमें  श्री हुसैन खान, श्री अल्ताफ हुसैन, श्री ग्यासुद्दीन सय्यद और श्री मुहम्मद समीम आदि शामिल थे.

एमपीजे ने महाराष्ट्र सरकार से अल्पसंख्यक समुदायों के कल्याण पर ध्यान देने की लगाई गुहार

 



एमपीजे ने 18 दिसम्बर 2020 को अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के अवसर पर प्रदेश के जलगाँव, नांदेड़ और लातूर ज़िलों में जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक मेमोरेंडम सौंप कर महारष्ट्र में अल्पसंख्यक समुदायों के कल्याण के लिए बनी योजनाओं पर अमलबजावणी का अनुरोध किया. बता दें कि मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के लोग जीवन के हर क्षेत्र में पीछे हैं. मुस्लिम समुदाय के पिछड़ेपन का ख़ुलासा विभिन्न सरकारी समितियों और आयोगों की रिपोर्ट से हुआ है. किन्तु उन समितियों और आयोगों के मुस्लिम समुदाय को पिछड़ेपन के दलदल से निकालने के लिए की गई सिफारिशें आज तक लागू नहीं हो सकी हैं. जिसकी वजह से मुस्लिम समुदाय और पिछड़ गया है.


इसलिए एमपीजे ने सरकार से अविलम्ब मुस्लिम समुदाय के कल्याणार्थ बनी समस्त योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक क़दम उठाने की मांग की है.  एमपीजे ने प्रधानमंत्री १५ सूत्री कार्यक्रम और मल्टी सेक्टोरल डेवलपमेंट प्रोग्राम के कार्यान्वयन की समीक्षा किये जाने और इस के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने की मांग की है. 










किसानों को न्याय दे सरकार: एम पी जे

 



मुव्हमेंट फॉर पीस एंड जस्टिस फॉर वेलफेयर (एम पी जे) महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना ने किसानों को न्याय देने की अपील करते हुए सरकार से किसानों की समस्याओं को हल करने का अनुरोध किया है. ग़ौर तलब है कि एम पी जे ने पहले भी विवादित तीन कृषि क़ानून को रद्द करने की मांग की थी.


एम पी जे शुरू से ही किसानों की समस्याओं को उठाती रही है और इन तीन क़ानूनों को लेकर कृषि विशेषज्ञों से सलाह मशविरा करने के बाद इस नतीजे पर पहुंची है कि, ये क़ानून न केवल किसान विरोधी हैं, बल्कि आम आदमी विरोधी भी हैं.


इसलिए संगठन ने इन क़ानूनों को रद्द करने और एम एस पी से नीचे की खरीद को अवैध घोषित करने की मांग सरकार से की है.


एम पी जे महाराष्ट्र में विभिन्न जिलों में अन्य किसान संगठनों के साथ मिलकर किसानों को न्याय दिलाने हेतु प्रयासरत है.


प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर एम पी जे किसानों के हितार्थ धरना-प्रदर्शन कर रही है. इसके अलावा एम पी जे ने प्रदेश के विभिन्न भागों में ज़िला प्रशासन के माध्यम से मेमोरेंडम दे कर सरकार से किसानों की समस्याओं को हल करने का अनुरोध किया है.


























महाराष्ट्र की बीमार स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को बेहतर करे सरकार: एम पी जे

 

परभणी में मेमोरेंडम प्रस्तुत करते हुए एम पी जे टीम

मुंबई: मुव्हमेंट फ़ॉर पीस एंड जस्टिस फ़ॉर वेलफेयर (एम पी जे) ने आज महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार से  प्रदेश की बीमार स्वास्थ्य व्यवस्था को ठीक करने की गुहार  लगाई है. एम पी जे ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को मेमोरेंडम सौंप कर बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को ठीक करने और स्वास्थ्य पर जी डी पी का कम से कम 2% ख़र्च करने की अपील की है. 


गौर तलब है कि, कोविड-19 नाम की महामारी ने महाराष्ट्र में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है. कोरोना वायरस जैसी महामारी के सामने देश की सब से मज़बूत अर्थव्यवस्था वाले राज्य महाराष्ट्र के सरकारी हेल्थ केयर संस्थान बेबस नज़र आए और लॉक डाउन पीरियड में कोरोना से कम अन्य दूसरी बीमारियों में लोगों को समुचित हेल्थ केयर सुविधा नहीं मिलने की वजह से ज़्यादा मौतें हुई हैं.  


एम पी जे ने स्वास्थ्य के मुद्दे पर एक राज्यव्यापी आन्दोलन चलाया और इस आन्दोलन के दौरान हम ने पी एच सी से लेकर ज़िला अस्पताल तक का सर्वे किया. इस सर्वे में राज्य की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में अनेक खामियां सामने आई हैं. प्रदेश में जनसँख्या के अनुपात में हेल्थ केयर संसथान नहीं हैं. इसके अलावा आई पी एच एस मानदंडों के मुताबिक़ मिलने वाली सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं. हज़ारों की तादाद में डॉक्टर्स और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ़ के पद रिक्त पड़े हैं.


एम पी जे के इस अभियान से इस बात का ख़ुलासा हुआ है कि, महाराष्ट्र में कोविड-19 के इलाज के लिए निजी अस्पतालों ने मनमाना पैसा वसूल किया  है. इसलिए एम पी जे ने प्रदेश सरकार से स्वास्थ्य पर सरकारी ख़र्च बढ़ाने तथा क्लिनिकल एस्टब्लिश्मेंट्स (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) अधिनियम लागू करने की अपील की है.


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