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MPJ का लिंग-संतुलित महाराष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ महिला दिवस संपन्न




सोलापुर: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज यहाँ मुव्हमेंट फ़ॉर पीस एंड जस्टिस फ़ॉर वेलफेयर (MPJ) ने महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से एक कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में अपना उत्कृष्ट योगदान दे रही महिलाओं ने बतौर वक्ता कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का मार्गदर्शन किया.

MPJ द्वारा यह कार्यक्रम सोलापुर स्थित वसुंधरा कला महाविद्यालय तथा राज्य विधि सेवा प्राधिकरण के साथ संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था, जिसकी अध्यक्षता वसुंधरा कला महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. (श्रीमती) मीना गायकवाड़ ने किया.

इस अवसर पर महिलाओं हेतु विधि सेवा शिविर का भी आयोजन किया गया, जिसमें ज़िला न्यायालय की जजों माननीय श्रीमती यू एल जोशी और माननीय श्रीमती जे एम मिस्त्री ने महिलाओं के अधिकारों के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला.

इस अवसर पर नगर की प्रसिद्ध महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. (श्रीमती) फ़िरदौस सय्यद ने भी महिलाओं से सम्बंधित महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार व्यक्त किये.  


MPJ ज़िला अध्यक्ष अब्दुल खालिक़ मंसूर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि, हमारे लिए  महिला दिवस सिर्फ़ एक दिन का जश्न नहीं है, बल्कि एमपीजे के लिए महिला सशक्तिकरण एक अभियान है, जिसका लक्ष्य  लिंग-संतुलित महाराष्ट्र का निर्माण करना है.  








एमपीजे का महिला सशक्तीकरण सप्ताह हुआ समाप्त, महिलाओं को सशक्त बनाना समय की मांग



यवतमाल: अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस पर मूव्मेंट फॉर पीस एंड जस्टिस फॉर वेलफेयर (एमपी जे), जो देश की एक जानी-मानी जन आन्दोलन है, ने महिलाओं को सशक्त बनाने और लैंगिक न्याय को लेकर जनता को जागरूक करने के लिए महिला सशक्तिकरण सप्ताह का आयोजन किया. इस आयोजन के दौरान एमपीजे ने महिलाओं के अधिकार, लिंग असमानता और महिलाओं के शोषण जैसे मुद्दों पर जन जागरण का कार्य अंजाम दिया. 

एमपीजे ने अपने इस अभियान का समापन रविवार को यवतमाल में एक जनसभा आयोजित करके किया. इस सार्वजनिक सभा में विभिन्न समस्याओं से जूझते हुए अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया, जिनमें दिव्यांग शीरीं तबस्सुम, शिक्षाविद सोनाली मरगदे और प्रोफेसर संतोषी साहोलकर शामिल हैं.

इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक हस्तियों ने अपने विचार व्यक्त किए. सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र की महिलाओं ने महिलाओं के अधिकारों पर चर्चा करते हुए कहा कि मौजूदा दौर में महिलाओं का ज़बरदस्त शोषण हो रहा है और महिलाओं की शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों का दायरा ​​जिला और तहसील स्तर तक नहीं बढ़ाया जा रहा है. उच्च शिक्षा से महिलाओं को दूर रखना भी एक प्रकार का शोषण है. वक्ताओं ने बच्चियों के साथ हो रहे यौन उत्पीड़न पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि, यौन हिंसा की घटनाओं से कन्याओं के  माता-पिता में खौफ का माहौल व्याप्यत है और महिला विरोधी हिंसा, उत्पीड़न व दुर्व्यवहार के विरुद्ध सरकारी पहल केवल बजट दस्तावेजों और फाइलों तक सीमित दिखते हैं.




इस अवसर पर महिलाओं की आर्थिक स्थिति और संवैधानिक अधिकार, महिलाओं की सामाजिक स्थिति और महिलाओं की शैक्षणिक स्थिति पर सविस्तार प्रकाश डाला गया. प्रोफेसर वर्षा निकम और अन्य वक्ताओं ने उपस्थित महिलाओं का मार्गदर्शन किया. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ तसनीम बानो, सचिव महिला विंग, एमपीजे ने किया. 

उन्होंने बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं को संबोधित करते हुए, महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए देश में मौजूद विभिन्न सरकारी योजनाओं का ज़िक्र किया तथा इन योजनाओं से अधिक से अधिक महिलाओं को लाभान्वित होने की अपील की. उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाना समय की मांग है. महिलाओं को उसका जाएज़ अधिकार दिए बिना समाज में शांति, चैन और सुकून संभव नहीं है.

एम् पी जे ने मनाया महिला दिवस



नागपुर: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मोवमेंट फॉर पीस एंड जस्टिस फॉर वेलफेयर (एम् पी जे) ने नागपुर में महिला सशक्तिकरण पर एक अखिल महाराष्ट्र महिला गोष्ठी का आयोजन किया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी रही तथा वक्ताओं ने स्वास्थ्य से ले कर आर्थिक सशक्तिकरण के मुद्दों पर महिलाओं का मार्गदर्शन किया! गोष्ठी में शामिल हुई तमाम महिलाओं का स्वागत करते हुए एम् पी जे, महिला कोष्ठ की प्रदेश सचिव डॉक्टर तसनीम बानो ने महिला के स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़े अहम् मामलों पर प्रकाश डाला! इस संगोष्ठी को संबोधित करते हुए, डॉ. (श्रीमती) भाग्लाने ने मानवता के विकास में महिलाओं की भूमिका पर सविस्तार चर्चा की!  श्रीमती योगिनी ताई दोडके ने भी महिलाओं के पोषण एवं अन्न के अधिकारों पर सविस्तार बात की! इस अवसर पर पर  ज़ैनुल आबेदीन, सचिव एम् पी जे ने कहा कि, मुल्क में महिलाएं मर्दों से ज़्यादा काम करती हैं तथा उन्हें पब्लिक लाइफ में 33% नहीं बल्कि 50% रिजर्वेशन मिलना चाहिए!
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