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प्री-मैट्रिक अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति की राशी में वृद्धि के साथ साथ इनकम सर्टिफिकेट जमा करने की शर्त को ख़त्म करे सरकार: एम पी जे



प्री-मैट्रिक स्तर पर छात्रवृत्ति अल्पसंख्यक समुदायों से माता-पिता को अपने स्कूल जाने वाले बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु शुरू किया गया था. इस योजना का मक़सद स्कूल शिक्षा पर ग़रीब माता-पिता के वित्तीय बोझ को हल्का करने और स्कूल ड्राप आउट की दर को कम करना था और शिक्षा के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदायों का सशक्तिकरण कर के उनके सामाजिक आर्थिक स्थितियों में परिवर्तन लाना था. किन्तु ये योजना भी प्रथम दिन से ही लालफीताशाही का शिकार रही है.

 

आपको बता दें कि महाराष्ट्र में अल्पसंख्यक प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति का भुगतान शुरू से ही विवादित रहा है. महाराष्ट्र सरकार को केंद्र सरकार से छात्रवृत्ति निधि प्राप्त होने के बावजूद वर्षों तक बच्चों को छात्रवृत्ति के पैसे नहीं दिए गए थे. एमपीजे ने इसके लिए सड़क से लेकर अदालत तक एक सफल लड़ाई लड़ी है. एमपीजे के ही न्यायिक हस्तक्षेप के बाद राज्य में इस योजना के तहत पहली बार बच्चों को छात्रवृत्ति की राशि का भुगतान किया गया था. मुव्हमेंट फ़ॉर पीस एंड जस्टिस फ़ॉर वेलफेयर (एमपीजे ) शुरू से ही स्कालरशिप की लड़ाई लड़ती आई है.


गौर तलब है कि, महाराष्ट्र में प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना (2020-21) के लिए लाखों नए और नवीकरण आवेदन ऑनलाइन प्रस्तुत किए गए हैं. हमेशा की तरह इस बार भी, संबंधित स्कूलों और शिक्षा कार्यालयों ने राज्य नोडल अधिकारी को सत्यापित आवेदन पत्र अग्रेषित किए थे.

 

किन्तु, ज्ञात हुआ है कि, महाराष्ट्र राज्य के नोडल अधिकारी ने अपने पत्र दिनांक 18 और 21 जनवरी 2021 के संदर्भ में सभी नए और नवीकरण आवेदन वापस कर दिए हैं, और सक्षम प्राधिकारी से आय प्रमाण पत्र के प्रमाण की मांग करते हुए सभी आवेदनों को फिर से सत्यापित करने का निर्देश दिया है. गौर तलब है कि, प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आय प्रमाण के रूप में स्व घोषणा/शपथ पत्र को आय प्रमाण के रूप में माना जाता है, किन्तु अल्पसंख्यक के मामले में सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्गत आय प्रमाण पत्र को फिर से सत्यापित करने का आदेश दिया गया है, जो समझ से परे है.

एम पी जे ने महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधान मंत्री को ज्ञापन सौंप कर इनकम सर्टिफिकेट जमा करने की शर्त को ख़त्म करने और स्व घोषणा / शपथ पत्र को आय प्रमाण के रूप में मानने का अनुरोध किया है. इसके अलावा प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक स्कालरशिप की राशि को बढ़ाने का भी अनुरोध किया है.    










एमपीजे ने महाराष्ट्र सरकार से अल्पसंख्यक समुदायों के कल्याण पर ध्यान देने की लगाई गुहार

 



एमपीजे ने 18 दिसम्बर 2020 को अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के अवसर पर प्रदेश के जलगाँव, नांदेड़ और लातूर ज़िलों में जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक मेमोरेंडम सौंप कर महारष्ट्र में अल्पसंख्यक समुदायों के कल्याण के लिए बनी योजनाओं पर अमलबजावणी का अनुरोध किया. बता दें कि मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के लोग जीवन के हर क्षेत्र में पीछे हैं. मुस्लिम समुदाय के पिछड़ेपन का ख़ुलासा विभिन्न सरकारी समितियों और आयोगों की रिपोर्ट से हुआ है. किन्तु उन समितियों और आयोगों के मुस्लिम समुदाय को पिछड़ेपन के दलदल से निकालने के लिए की गई सिफारिशें आज तक लागू नहीं हो सकी हैं. जिसकी वजह से मुस्लिम समुदाय और पिछड़ गया है.


इसलिए एमपीजे ने सरकार से अविलम्ब मुस्लिम समुदाय के कल्याणार्थ बनी समस्त योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक क़दम उठाने की मांग की है.  एमपीजे ने प्रधानमंत्री १५ सूत्री कार्यक्रम और मल्टी सेक्टोरल डेवलपमेंट प्रोग्राम के कार्यान्वयन की समीक्षा किये जाने और इस के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने की मांग की है. 










कॉर्पोरेट ऋण माफ करने के बजाए लोकहित के मदों पर खर्च किया जाए, तो देश की अधिकांश समस्याएं समाप्त हो जाएँगी: नीरज जैन




मुंबई: मुव्हमेंट फ़ॉर पीस एंड जस्टिस फ़ॉर वेलफेयर ने आज यहां "वर्तमान परिस्थितियों में सामाजिक सक्रियता की गुंज़ाइश" पर एक सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किया.   इस अवसर पर एमपीजे के प्रदेश अध्यक्ष मुहम्मद सिराज ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि लोग केंद्र में सत्ता परिवर्तन की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन चुनाव परिणाम हमारे सामने हैं.  भारतीय जनता पार्टी ने बहुमत से चुनाव जीत कर सत्ता पर अपना क़ब्ज़ा बरक़रार रखा है. यह देश की जनता का निर्णय है. आरोप-प्रत्यारोप और दोषारोपण व्यर्थ ही नहीं, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों के ख़िलाफ़ है. क्योंकि लोकतंत्र में जनमत ही सर्वोपरी होता है और हमें इसका सम्मान करना चाहिए.

उन्हों ने कहा कि, यह सच है कि इस लोकसभा चुनाव में जनता के वास्तविक मुद्दों को दरकिनार करते हुए छद्म राष्ट्रवाद और देशभक्ति को मुद्दा बनाया गया, जो हमारे वास्तविक मुद्दे हैं ही नहीं. आज देश की जनता के सामने अनेक समस्याएं विकराल रूप धारण किये खड़ी हैं, जिसका हल हमें ढूँढना है.  किन्तु हमें हताश और निराश होने की ज़रुरत नहीं है. हमें जनता के बीच जाना होगा और उनके वास्तविक मुद्दों पर बात करनी होगी. सरकार को यह याद दिलाना होगा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को गरिमामय जीवन जीने की गारंटी देता है.

सभा को संबोधित करते हुए जनता साप्ताहिक के एसोसिएट एडिटर तथा लोकायत नामी ग़ैर सरकारी संगठन के संयोजक नीरज जैन ने दुनिया में बढ़ते हुए फ़ासीवाद के कारणों पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि देश में फ़ासीवाद बड़ी तेजी से बढ़ रहा है. देश के संविधान पर ख़तरा मंडरा रहा है. देश के सामने आर्थिक संकट एक बड़ी चुनौती बन कर उभरी है. सत्ता का सुख भोग रहे लोग राष्ट्र हित एवं जनहित की परवाह किए बग़ैर पूंजीपतियों को फ़ायेदा पहुँचाने में लगे हैं. पूंजीपति वर्ग को अपने फ़ायेदे के लिए देश के बैंकों के पैसों से लेकर प्राकृतिक संसाधनों तक का इस्तेमाल करने की खुली छूट है. इतना ही नहीं, मुल्क के पूंजीपतियों ने जो हमारी अर्थव्यवस्था को चुना लगाया है, उसकी भरपाई भी हम विदेशी क़र्ज़ों से कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जितना पैसा हम कॉर्पोरेट ऋण को माफ करने के लिए ख़र्च कर रहे हैं, अगर उसे लोकहित के मदों पर खर्च किया जाता, तो देश की अधिकांश समस्याएं समाप्त हो सकती थी. उन्होंने कहा मोदी सरकार स्वतंत्र भारत में सबसे अधिक किसान विरोधी सरकार साबित हुई है. भाजपा की नीतियों के कारण देश में बेरोज़गारी बहुत गंभीर समस्या बन गई है.



पूर्व बीबीसी संपादक और पूर्व टीवी टुडे के प्रबंध संपादक रिफ़त जावेद ने कहा कि, आज देश में भ्रष्टाचार, भूख, बीमारी और बेरोज़गारी जैसी अनेक समस्याएं हैं, जिसने आम आदमी की ज़िन्दगी को नारकीय बना दिया है. आज देश में एक विशेष समुदाय के विरुद्ध नफ़रत पैदा करने की कोशिश की जा रही है. लेकिन नफ़रत का जवाब नफ़रत नहीं हो सकता है, बल्कि नफ़रत को मुहब्बत ही ख़त्म कर सकती है. उन्हें देश में नैतिक मूल्यों पर आधारित राजनीतिक विकल्प पेश करने और जनसमस्याओं को ख़त्म करने के लिए अपनी पहचान के साथ  आगे आना होगा.

उन्होंने कहा कि यूरोप में भूख, बीमारी और जिहालत कोई समस्या नहीं है, लेकिन प्राकृतिक एवं मानव संसाधनों के धनी देश भारत में आज भी ये समस्याएं गंभीर बनी हुई हैं. देश का सामाजिक बजट सिकुड़ता जा रहा है.

इस कार्यक्रम में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. महेश काम्बले की भी गरिमामय उपस्थिति रही.

अल्पसंख्यक समुदाय के कल्याणार्थ योजनाओं के कार्यान्वयन की समीक्षा करे सरकार: एमपीजे




एमपीजे ने अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के अवसर पर नांदेड़ और लातूर ज़िलों में जन सभा का आयोजन किया. इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी रही. सभा में उपस्थित तमाम लोग इस बात पर सहमत दिखे कि सर्वसमावेशी विकास के बिना भारत एक विकसित देश नहीं बन सकता है और देश में मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के लोग जीवन के हर क्षेत्र में पिछड़ते जा रहे हैं. इसलिए सरकार को अविलम्ब मुस्लिम समुदाय के कल्याणार्थ बनी समस्त योजनाओं के कार्यान्वयन पर ध्यान देना चाहिए. इस अवसर पर एमपीजे ने डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को ज्ञापन दे कर १५ सूत्री कार्यक्रम और मल्टी सेक्टोरल डेवलपमेंट प्रोग्राम के कार्यान्वयन की समीक्षा किये जाने और इस के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने की मांग की.  


महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग मुंबई के उपाध्यक्ष श्री जे.एम. अभ्यंकर साहेब के साथ सरकारी विश्राम कार्यालय, लातूर में एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें अल्पसंख्यक योजनाओं के कार्यान्वयन के संबंध में चर्चा हुई.














एमपीजे ने 17 नवम्बर को सच्चर दिवस मनाया


मुंबई: मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के पिछड़ेपन को दूर करने के लिये सच्चर समिति के सिफ़ारिश पर प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने को ले कर आज सामाजिक कार्यकर्ताओं ने राज्यव्यापी स्तर पर विरोध जताते हुए महाराष्ट्र सरकार से मुस्लिम समुदाय के विकास के लिए त्वरित एवं समुचित क़दम उठाने की फरियाद की.

आपको बता दें कि भारत सरकार ने वर्ष 2005 में मुस्लिम समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति की समीक्षा करने हेतु जस्टिस राजेंद्र सच्चर की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था. उक्त समिति ने 17 नवंबर 2006 को सरकार को अपनी रिपोर्ट पेश कर के मुस्लिम समुदाय के सामाजिक-आर्थिक दुर्दशा पर चौंकाने वाले तथ्य सामने लाया था.

इसके अलावा मह्मूदुर रहमान समिति ने भी मुस्लिम समुदाय की चिंताजनक सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर तत्काल कदम उठाने की पूर ज़ोर वकालत की थी. लेकिन सच्चर समिति की रिपोर्ट पेश होने के इतने वर्षों बाद भी मुस्लिम समुदाय की सामाजिक और आर्थिक स्थिति बाद से बदतर होती जा रही है और यह समुदाय ग़रीबी और पिछड़ेपन के दलदल से निकाले जाने के लिए उन त्वरित विशेष कदम का इंतजार कर रही है, जिसकी सिफ़ारिश सच्चर समिति की रिपोर्ट में की गई थी.

एमपीजे ने मुसलमानों के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए सरकार का ध्यान आकर्षित करने हेतु 17 नवम्बर को महाराष्ट्र में राज्यव्यापी स्तर पर सच्चर डे मनाया. एमपीजे सच्चर समिति की सिफारिशों को पूरी तरह से लागू करने हेतु महाराष्ट्र सरकार से पहले दिन से ही गुहार लगाती रही है.

संगठन ने 17 नवम्बर 2018 को महाराष्ट्र के हर ज़िले में जिलाधिकारी के माध्यम से महाराष्ट्र सरकार को ज्ञापन प्रस्तुत करके सच्चर समिति एवं महमूदूर रहमान कमिटी की सिफारिशों को पुर्णतः लागू करनेप्रधानमंत्री के 15 सूत्री कार्यक्रम और एमएसडीपी का समय पर और उचित कार्यान्वयन सुनिश्चित करने, विभिन्न अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं के कार्यान्वयन के लिय जवाबदेही तय करने और सार्वजनिक निगरानी तंत्र की व्यवस्था करने का प्रबंध किये जाने, विविधता सूचकांक (Diversity Index) के आधार पर शैक्षिक अनुदान और सार्वजानिक ठेका आवंटित करने, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय के सिफ़ारिश के अनुसार शिक्षा के क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय को आरक्षण देने की व्यवस्था किये जाने, अल्पसंख्यकों के लिए राज्य के कल्याण के बजट को बढ़ाने, राज्य विधानसभा में अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा रोकने हेतु ‘सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा निषेध विधेयक’ लाने का प्रबंध करने, तथा सच्चर समिति की सिफ़ारिश के अनुसार एक समान अवसर आयोग और स्वायत्त आकलन तथा निगरानी प्राधिकरण का गठन करने की मांग की है.

इस अवसर पर एमपीजे अल्पसंख्यकों के कल्याणार्थ विशेष व्यवस्था नहीं किये जाने के विरोध में ज़िला मजिस्ट्रेट कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन का भी आयोजन किया.











लातूर: एमएसडीपी के तहत दो साल पूर्व बीस करोड़ रुपये का फण्ड रिलीज़ होने के बावजूद काम शुरू नहीं हो पाया





मल्टी सेक्टोरल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत राज्य सरकार द्वारा महाराष्ट्र के उदगीर और लातूर नगरों में विभिन्न शैक्षिणिक प्रोग्राम्स के लिए दस-दस करोड़ के दो प्रोजेक्ट्स मंज़ूर होने के बावजूद इन प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू नहीं हो पाया है. दरअसल इन परियोजनाओं के लिए मंज़ूर शुदा रक़म दो साल से ज़िला कलेक्टर के खाते में जमा है और अभी तक इन प्रोजेक्ट्स के लिए इस फण्ड का इस्तेमाल नहीं हो पाया है.



एम एस डी पी  के तहत उदगीर में लड़के और लड़कियों के लिए हॉस्टल का निर्माण, जिला परिषद के उर्दू स्कूल के भवन  का निर्माण  तथा अल्पसंख्यक आई टी आई  हेतु दस करोड़ का फण्ड मंज़ूर किया गया था. इसके अलावा लातूर में लड़के के हॉस्टल का निर्माण और अन्य शैक्षणिक संसथान की स्थापना हेतु दस करोड़ का फण्ड मंज़ूर किया गया था. उक्त परियोजनाओं हेतु ज़िला कलेक्टर के खाते में फण्ड दो साल पूर्व ही  जमा कर दिया गया था. किन्तु दो साल गुज़र जाने  के बावजूद अब तक इन परियोजनाओं पर काम शुरू नहीं हो पाया है.


गौर तलब है कि मुव्मेंट फ़ॉर पीस एंड जस्टिस फॉर वेलफेयर (एमपीजे) गत कई वर्षों से अल्पसंख्यकों के विकास हेतु एम एस डी पी  एवं अन्य कार्यक्रमों को समय पर समुचित ढंग से लागू करने हेतु सरकार से गुहार लगाती आई है.  लातूर ज़िले के इस मामले में भी एमपीजे ने म्युनिसिपल कमिश्नर को मेमोरेंडम सौंप कर अविलम्ब इन परियोजनाओं हेतु निर्माण कार्य शुरू करने की मांग की है.





माइनॉरिटी डे 2017


एम् पी जे ने 18 दिसम्बर को माइनॉरिटी डे पर नांदेड ज़िले में नांदेड नगर निगम द्वारा आयोजित  एक कार्यक्रम में भाग लिया! नांदेड नगर निगम द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एम् पी जे के प्रदेश सचिव अल्ताफ़ हुसैन थे! इस कार्यक्रम की अध्यक्षता नांदेड़ की महापौर श्रीमती सीला भूरे ने की और इस कार्यक्रम में म्युनिसिपल कमिश्नर श्री गणेश देशमुख, डिप्टी कमिश्नर श्री रत्नाकर वाघमारे, नगर निगम के अधिकारीगण एवं अन्य कर्मी भी उपस्थित थे! इस अवसर पर एम् पी जे के प्रदेश सचिव अल्ताफ़ हुसैन ने प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को उनका अधिकार दिलाए जाने के लिए संगठन द्वारा किये जा रहे प्रयासों को लोगों के सामने रखते हुए कहा कि, एम् पी जे प्रदेश में अमन व इन्साफ की स्थापना हेतु काम करने के लिए प्रतिबद्ध है!

उल्लेखनीय है कि एम् पी जे अल्पसंख्यक समुदाय को उनका अधिकार दिलाने के लिए वर्षों से संघर्ष कर रही है! संगठन ने महाराष्ट्र सरकार से सूचना के अधिकार के तहत अल्पसंख्यक कल्याण हेतु विभिन्न योजनाओं के कार्यान्वयन पर जानकारी मांगी थी! किन्तु सम्बंधित विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र में अल्पसंख्यांक योजनाओं का कार्यान्वयन नाम मात्र ही हो रहा है! इस मुद्दे को लेकर एम् पी जे ने बॉम्बे हायकोर्ट मे दो जनहित याचिका भी दायर की है!


एम् पी जे का अल्पसंख्यकों को इन्साफ दिलाने के लिए संघर्ष जारी है!









एमपीजे ने राज्यव्यापी स्तर पर सच्चर दिवस मनाया और राज्य सरकार से मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के कल्याण हेतु ठोस कदम की मांग की


मूव्मेंट फॉर पीस एंड जस्टिस फॉर वेलफेयर (MPJ) ने 17 नवम्बर 2017 को राज्य के तक़रीबन सभी जिलों में जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष राज्य में मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के कल्याणार्थ सच्चर समिति की सिफारिशों को अविलम्ब पूर्ण रूप से लागू करने हेतु धरना-प्रदर्शन आयोजित किया और जिलाधिकारी महोदय के माध्यम से राज्य सरकार को एक ज्ञापन सौंप कर मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के हितों के रक्षार्थ अविलम्ब क़दम उठाने की मांग की है।

दरअसल एम् पी जे पहले भी अल्पसंख्यक समुदायों के कल्याण हेतु योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने हेतु सरकार से अनुरोध करती रही है। यह एक सर्वविदित तथ्य है कि मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय अपनी खराब शैक्षिक और आर्थिक पिछड़ेपन के कारण जीवन के हर क्षेत्र में निचले पायदान पर है। यह अनेक सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण तथा केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा गठित आयोग एवं समितियों के रिपोर्टों के माध्यम से सामने आता रहा है। तमाम सर्वे, आयोग एवं समितियों का यही निष्कर्ष रहा है कि, मुस्लिम समुदाय की सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक दशा दयनीय है तथा इस समुदाय को पिछड़ेपन के दलदल से निकालने हेतु शिक्षा एवं नौकरी में आरक्षण देने जैसे विशेष उपाय करने की ज़रुरत है। रंगनाथ मिश्र और मह्मुदुर्रह्मान समिति ने भी इस समुदाय को आरक्षण देने की पुरज़ोर सिफारिश की है।
  
पिछली सरकार ने महाराष्ट्र राज्य में शिक्षा और रोजगार में मुसलमानों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया था। हालांकि माननीय बॉम्बे हाई कोर्ट ने नौकरी के आरक्षण को खत्म कर दिया था, किन्तु शिक्षा में समुदाय के पिछड़ेपन को देखते हुए माननीय बॉम्बे हाई कोर्ट ने शिक्षा में आरक्षण को बरक़रार रखा, जिसकी माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी पुष्टि की। लेकिन आज तक मुस्लिम समुदाय को शिक्षा में आरक्षण का लाभ नहीं मिल सका है।

प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदाय के कल्याण और विकास के लिए बनाई गयी योजनाएं भी सिर्फ कागज़ पर ही दिखती हैं। महराष्ट्र सरकार ने इस बाबत अभी तक कोई ठोस क़दम नहीं उठाया है। विभिन्न स्रोतों से एकत्र जानकारी के अनुसार राज्य सरकार अल्पसंख्यक केंद्रित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के विकास के लिए मल्टी सेक्टोरल विकास कार्यक्रम (MSDP) के धन का भी पूरी तरह उपयोग नहीं कर पायी है। जिसके चलते, मल्टी सेक्टोरल विकास कार्यक्रम का लाभ मुस्लिम क्षेत्रों तक नहीं पहुँच पाया है।

इसके अलावा अल्पसंख्यकों के विकास हेतु महाराष्ट्र सरकार द्वारा बजटीय आवंटन की राशि भी पर्याप्त नहीं है। दूसरी परेशान करने वाली बात यह है कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा आवंटित इस अल्प राशि का भी ठीक ढंग से उपयोग नहीं हो पाता है। प्रदेश में अल्पसंख्यक आयोग में न तो अध्यक्ष है और न ही मौलाना आज़ाद माइनॉरिटी फाइनेंस डेवलपमेंट कारपोरेशन और महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड में फुल टाइम सीईओ।

महाराष्ट्र सरकार के जीआर संख्या:अविवि 2010/प्र.क्र.3/10/का.9 दिनांक 29/4/2011 के अनुसार प्रधान मंत्री के 15 सूत्री कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने हेतु ज़िला स्तर पर एक कमिटी का गठन किये जाने का प्रावधान किया गया था, किन्तु यह कमिटी भी कई सालों से निष्क्रिय है और साल भर में एक बैठक भी नहीं कर पाती है।   

एम् पी जे ने जिलाधिकारी के माध्यम से राज्य सरकार को मेमोरेंडम सौंप कर अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं के कार्यान्वयन हेतु निम्नलिखित मांगें राखी हैं:

  1. सच्चर समिति की सिफारिशों को पुर्णतः लागू किया जाए,
  2. प्रधानमंत्री के 15 सूत्री कार्यक्रम और एमएसडीपी का समय पर और उचित कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाए,
  3. माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय के सिफारिश के अनुसार शिक्षा के क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय के आरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाया जाए,
  4. विभिन्न अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं को लागू करने वाले विभागों में सालों से रिक्त पदों पर स्टाफ की नियुक्ति की जाए,
  5. अल्पसंख्यकों के लिए राज्य के कल्याण के बजट को बढ़ाया जाए,
  6. सच्चर समिति के सिफारिश के अनुसार एक समान अवसर आयोग और स्वायत्त आकलन तथा निगरानी प्राधिकरण का गठन किया जाए।















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