एम पी जे ने शिक्षा के अधिकार के तहत 25% आरक्षित सीटों पर चल रही ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया पर उठाए सवाल


महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रदेश में शिक्षा के अधिकार के अंतर्गत समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के स्टूडेंट्स के लिए 25% आरक्षित सीटों पर प्रवेश की प्रक्रिया 16 जनवरी 2017 को ही शुरू कर दी गयी थी, किन्तु अधिकांश अभिभावकों को प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों में मुफ़्त शिक्षा प्राप्ति की सुविधा उपलब्ध होने की जानकारी ही नहीं है, जिसके चलते प्रदेश में आरक्षित सीटों के मुक़ाबले प्रवेश के लिए काफ़ी कम संख्या में आवेदन जमा किये गए हैं! आज यहाँ प्रेस को संबोधित करते हुए एम पी जे के प्रदेश अध्यक्ष मुहम्मद सिराज ने यह जानकारी दी! मूवमेंट फॉर पीस एंड जस्टिस फॉर वेलफेयर (एम पी जे), जो एक जनांदोलन है के द्वारा इस मुद्दे पर राज्यव्यापी जन-जागरण अभियान चलाया जा रहा है!

मुहम्मद सिराज ने कहा कि, जहाँ एक तरफ़ प्रशासनिक अकर्मण्यता के कारण तो दूसरी तरफ़ प्राइवेट स्कूल प्रबंधन द्वारा शिक्षा के अधिकार क़ानून के तहत ग़रीब एवं वंचित वर्ग के लोगों को अशिक्षा के अन्धकार से बाहर निकालने के लिए किये गए उपायों का सही ढंग से पालन नहीं किए जाने से 25% आरक्षित सीटों का वांछित लाभ लक्षित समूह तक नहीं पहुँच पा रहा है! उन्हों ने कहा कि, प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने के बाद ही ऑनलाइन एडमिशन पोर्टल के ठीक ढंग से काम नहीं करने तथा कई स्कूलों द्वारा रजिस्ट्रेशन नहीं कराने का मामला सामने आया था,जिसकी जानकारी हमने एक मेमोरेंडम द्वारा शिक्षा मंत्रालय को दे दी थी! इतना ही नहीं, कई स्कूलों ने उपलब्ध सीटों की संख्या भी कम दिखाई है!

गौर तलब है कि, शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत बने नियमानुसार शिक्षा अधिकारीयों पर लक्षित समूह को इस सुविधा  के सम्बन्ध में जागृत करने और लक्षित समूह के बच्चों को प्रवेश के लिए चिन्हित करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गयी है! किन्तु शिक्षा  अधिकारीयों द्वारा न तो कोई जनजागरण अभियान चलाया गया और न ही प्रवेश के पात्र बच्चों की पहचान करने के लिए सर्वे किया गया!


एम पी जे के महासचिव अफसर उस्मानी ने कहा कि, जब से यह क़ानून लागू हुआ है, समाज का एक वर्ग अमली तौर पर इसे लागू होने में बाधा उत्पन्न करता नज़र आ रहा है! इस क़ानूनी प्रावधान को अदालत में भी चुनौती दी गयी और इस का लाभ वंचितों तक नहीं पहुंचे इसके लिए संस्थागत तंत्र काम कर रहा है! उन्हों ने प्रदेश सरकार से एडमिशन के लिए आवेदन जमा करने की तिथि को बढ़ाने के साथ-साथ उन प्राइवेट स्कूलों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की, जिन्हों ने ख़ुद को इस एडमिशन प्रोसेस से बाहर रखा! इसके साथ ही सही ढंग से जन-जागरण के लिए काम करने की भी मांग की!

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